INS KARANJ

 


स्कॉर्पिन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी ‘करंज’

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय नौसेना की स्कॉर्पिन श्रेणी (Scorpene Class) की अत्याधुनिक और स्वदेशी पनडुब्बी ‘आईएनएस करंज’ (INS Karanj) को मुंबई में लॉन्च कर दिया गया है। यह स्कॉर्पिन वर्ग की तीसरी पनडुब्बी है।
  • नई पनडुब्बी का नाम 2003 में सेवा मुक्त किये गए कलवरी क्लास के ‘आईएनएस करंज’ के नाम पर रखा गया है। 


 बिंदु 



स्कॉर्पिन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी ‘करंज’ को मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), मुंबई द्वारा निर्मित किया गया है।

'करंज' एक स्वदेशी पनडुब्बी है, जो 'मेक इन इंडिया' के तहत तैयार की गई है। अपनी आधुनिक विशेषताओं की वजह से यह पनडुब्बी अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना लगा सकती है।

67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊँची और 1565 टन वज़नी करंज टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइल से हमला करने और रडार को चकमा देने में सक्षम है।

यह पनडुब्बी लंबे समय तक पानी में रहने में सक्षम है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन खत्म होने पर अंदर ही ऑक्सीजन बनाने की भी क्षमता है। 

इसकी आवश्यकता ऐसे मौकों पर और बढ़ जाती है, जब चीन और पाकिस्तान की नौसेना हिंद महासागर में अपनी सक्रियता बढ़ा रही है।

नौसेना में आधिकारिक रूप से शामिल होने से पहले करंज का बंदरगाह और समुद्र दोनों में सख्त मानकों पर जाँच और परीक्षण किया जाएग। 

इस पनडुब्बी का एमडीएल द्वारा अनावरण रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा 'मेक इन इंडिया' को सक्रिय रूप से लागू किये जाने की पुष्टि करता है।

पृष्ठभूमि

INS KARANJ


  • प्रोजेक्ट 75 के तहत मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा स्कॉर्पिन वर्ग की छह पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है।
  • स्कॉर्पिन वर्ग की पनडुब्बियाँ परंपरागत रूप से डीज़ल-इलेक्ट्रिक इंजनों से चलने वाली पनडुब्बियाँ होती है।
  • इसके लिये अक्तूबर 2005 में फ्राँस के नेवल ग्रुप के साथ समझौता किया गया था, जो स्कॉर्पिन श्रृंखला की पनडुब्बियों के निर्माण और आवश्यक तकनीकी हस्तांतरण के लिये सहायता कर रहा है।
  • हालाँकि, निर्माण कार्य में विलंब के चलते इस कार्यक्रम में चार साल की देरी हुई है। 
  • पिछले वर्ष 14 दिसंबर, 2017 को स्कॉर्पिन श्रेणी की पहली पनडुब्बी ‘आईएनएस कलवारी’  को आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
  • दूसरी स्कॉर्पिन पनडुब्बी ‘आईएनएस खांदेरी’ जनवरी 2017 में लांच की गई थी जो अभी परीक्षण से गुजर रही है और इस वर्ष के अंत में नौसेना में इसे शामिल कर लिया जाएगा।
  • शेष तीन पनडुब्बियाँ वेला (Vela), वागीर (Vagir) और वाग्शीर (Vagsheer) अभी निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं, जिन्हें 2020 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

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